तीन गुण

तीन गुण
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जीवन के तीन गुण
सफलता
सम्पन्नता
और अवस्था
अपनी तरफ खींचती है।
मित्रों को..
विरोधियों को भी...
सदा से ।
सभी बन जाते हैं मित्र।
छलकने लगता है प्रेम।
पर...
यह 'पर' बड़ा
गहरा सूचक है।
जैसे ही यह तीनों
ढलान पर
क्षीण होते है,
साफ दिखने लगता है सबका..
... प्रेम।
क्योंकि...
उनमें से कुछ
प्रेम करते हैं...
हृदय से,
कुछ देह से,
और कुछ...
बुद्धि से।
एक निष्काम, रहेगा सर्वदा।
दूसरा सकाम...
चला जाएगा,
और...
तीसरा,
जो प्रेम की आड़ में है,
पूर्ण विलोम।
रे...बचना इसी से है...
रहना है..
सा व धा न।

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