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श्री बगलाप्रत्यंगिरा कवचम्

श्रीबगलाप्रत्यंगिराकवचम् शिवउवाच
अधुनाऽहंप्रवक्ष्यामिबगलायाःसुदुर्लभम्
यस्यपठनमात्रेणपवनोपिस्थिरायते
प्रत्यंगिरांतांदेवेशिश्रृणुष्वकमलानने
यस्य