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अभ्युदय (मेरा देश)

अभ्युदय (मेरा देश)
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"बता साले...नाम क्या है तेरा...बता..."
वह पाकिस्तानी सैनिक गला फाड़ कर चीख रहा था।
अभ्युदय...विंग कमांडर अभ्युदय निरंकार।
उसका चेहरा अब भी निर्विकार था। उसका पूरा मुख रक्त से लथपथ था और नाक से भल्ल भल्ल बहता रूधिर उसकी बड़ी, काली और ऐंठी हुई मूँछों में जाकर न जाने कहाँ विलीन हो रहा था।
यह शत्रु देश का मिलिट्री हेड क्वार्टर था। मिलिट्रीबेस कैंप में रखी एक फौलादी कुर्सी पर उसे कस कर बाँधा गया था जो सम्भवतया यातना देने के लिए ही बनाई गई थी।
उसके दोनों हाथ रस्सी और गर्दन को पतली वायर रोप से पीछे की तरफ खींच रखा गया था।
...पर वह तना हुआ बैठा था। साढ़े छह फुट की पुष्ट देहयष्टि पर जैसे उसे दी गई यातना का कोई असर न था।
भारतीय वायुसेना की पोशाक जैसे उसके गोरे शरीर को गर्व से भर दे रही थी।
...अच्छा!
मिशन क्या है तेरा...
-नहीं बता सकता।
किस स्क्वॉड्रन से है?
-बताने की अनुमति नहीं है।
स्साले...हरामजादे...यहाँ तू कोई ससुराल नहीं आया है। यहाँ तो बस मेरी ही चलती है।
वह बहादुर धीरे से मुस्कुराया भर..
उसकी इस हँसी ने जैसे जलती अग्नि में घी डालने का काम कर दिय…