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श्री हनुमान जन्मोत्सव विशेष

श्री हनुमान जन्मोत्सव विशेष
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        प्रभु श्रीरामजी ने रावण का वध कर पृथ्वी को भार मुक्त कर दिया।
         विभीषण और सुग्रीव अपना राज सँभालने में लग गए थे।
          वानर अब भी अपने प्रभु राम को छोड़कर जाना चाहते नहीं थे, परन्तु प्रभु की आज्ञा से वे भी बुझे मन वापस लौटने लगे।
           सौमित्र अपने हाथों से सभी को फल-फूलों के साथ विदा दे रहे थे।
           विभीषण और सुग्रीव भी पुष्पक से अयोध्या तक श्री राम को पहुँचाने की अनुमति तो प्राप्त कर चुके थे, पर उन्हें फिर लौटना ही है।
        इधर श्रीराम एक विशाल शिला पर बैठे समुद्र की उठती गिरती लहरों को निर्विकार निहार रहे हैं।
और...
           हनुमानजी प्रभु के चरणों में बैठे हैं और अपने दोनों हाथों से बारी-बारी से चरणों को धोकर दुपट्टे से पोंछते और दबाने लगते हैं।
उनके नेत्र बन्द हैं...
मुख से मन्द स्वर में नामजप...
सीताराम! सीताराम! की ध्वनि निकल रही है...
जो किसी अन्य के कर्णो तक नही जाती।
बस हृदय में विराजमान प्रभु ही उसे सुन पा रहे हैं।
इस प्रकार हनुमंतलालजी देह और जीव दोनों से ही प्रभु सेवा का सुख पा रहे हैं...

सामवेद से...

नमस्ते अग्न ओजसे गृणन्ति देव कृष्टयः। अमैरमित्रमर्दय।।2/1samved
हे अग्नि देव! आप सामर्थ्यवान एवं अतुलनीय पराक्रम वाले हैं, इसलिए समस्त साधकजन आपको नमस्कार करते हैं। आप अहितकरियों के विनाशक हैं, उनका संहार करें।

उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः। दृशे विश्वाय सूर्यम्।3/11samved
संसार को सूर्य का दर्शन बोध करने के लिए, उसकी किरणों जातवेद(सूर्य) से जिसकी उत्पत्ति समझी जाती है-वे ऐसे ही अग्निदेव को धारण किए रहतीं हैं।

शं नो देवीरभिष्टये शं नो भवन्तु पीतये। शं योरभि स्रवन्तु नः। 3/13 samved
हमें सुख शांति प्रदान करने वाला जल प्रवाह प्रकट हो। वह जल पीने योग्य, कल्याणकारी एवं सूखकर हो।
(ध्यान दें कि सामवेद का अग्नि को समर्पित यह मंत्र जल के लिए है। संशय नहीं होना चाहिए । हमारे ऋषियों ने पहले ही यह खोज कर ली थी की जल का स्रोत भी अग्नि ही है और बाद में पाश्चात्य वैज्ञानिकों ने हमारे वेदों को डिकोड कर अग्नि ईंधन हाइड्रोजन और वायु अर्थात आक्सीजन के संयोग से H2O बनता है बताया।)

सोमं राजानं वरुणमग्निमन्वारभामहे।
आदित्यं विष्णु सूर्यं ब्रह्माणं च बृहस्पतिम्।10/1सामवेद
हम श्रेष्ठ श्रुति के माध्यम…