श्रीरामजानकी जी रूपध्यान

श्रीरामजानकी जी रूपध्यान
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पद राजीव बरनि नहिं जाहीं।
मुनि मन मधुप बसहिं जेन्ह माहीं॥
बाम भाग सोभति अनुकूला।
आदिसक्ति छबिनिधि जगमूला॥

 भगवान के उन ऐसे चरणकमलों का वर्णन कैसे किया जा सकता है जिनमें भक्त मुनियों के मन बसते हैं। भगवान के बाएँ भाग में सदा अनुकूल रहने वाली, शोभा की राशि जगत की मूलकारण रूपा आदिशक्ति श्री जानकीजी सुशोभित हैं॥

जासु अंस उपजहिं गुनखानी।
अगनित लच्छि उमा ब्रह्मानी॥
भृकुटि बिलास जासु जग होई।
राम बाम दिसि सीता सोई॥

जिनके अंश से गुणों की खान अगणित लक्ष्मी, पार्वती और ब्रह्माणी त्रिदेवों की शक्तियाँ उत्पन्न होती हैं तथा जिनकी भौंह के इशारे मात्र से ही जगत की रचना हो जाती है, वही भगवान की स्वरूपा शक्ति श्री सीताजी श्री रामचन्द्रजी की बाईं ओर स्थित हैं॥

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