सुप्रसिद्ध आरती ॐ जय जगदीश हरे का हिंदी अनुवाद


सुप्रसिद्ध आरती ॐ जय जगदीश हरे  का हिंदी अनुवाद
(प्रत्येक हिंदू मात्र नें इस सुप्रसिद्ध आरती को एक न एक बार अवश्य ही गाया होगा, पढ़ा होगा आइये एक प्रयास करते हैं कि इस आरती का, ध्यान का शाब्दिक अर्थ है क्या?)


प्रणवस्वरुप मैं समस्त जगत के स्वामी की जय-जयकार करता हूँ, जो कि शरण में आये अपने सभी भक्त और दास के संकट को क्षण में ही दूर कर देते हैं। आप का ध्यान करने से न केवल मन के समस्त दुःख दूर हो जाते हैं, बल्कि तन के कष्टों से मुक्ति मिलती है और सुख-संपत्ति भी प्राप्त होती है। आप ही मेरी माता है और आप ही मेरे पिता, और किसके पास मैं शरण लूँ। आप के सिवा मेरा कोई भी नहीं है जिससे मैं आशा कर सकता हूँ। आप पूर्ण परमात्मा हैं। आप अंतर्यामी है। आप ही परब्रह्म परमेश्वर और समस्त लोकों के स्वामी हैं। आप श्रीराम के रूप में करुणा के सागर हैं तो श्रीनारायण के रूप में पालनकर्ता भी। मैं मूर्ख, अज्ञानी, दुष्ट तथा कामी हूँ, प्रभु ! आप  मेरे स्वामी हैं, मुझपर कृपा करें। आप अगोचर है, निराकार हैं और इस रूप में समस्त चराचर के ह्रदय में निवास करने वाले प्राणों के स्वामी भी। हे दयामय ! मैं दुर्बुद्धि आपसे कैसे मिलूँ? हे मेरे प्रभु कृपा करके आप मुझे अपनी शरण में ले लेवें। आप दीनबंधु और दीनों के नाथ हैं। आप दुखों का हरण करने वाले हैं। आप ही स्वामी हैं, आप ही ठाकुर, आप ही भर्तार हैं और आप ही रक्षक। मैं तो आपके द्वार पर पड़ा हूँ, मेरे प्रभु ! आपने हाथ बढाकर मुझे अपनी शरण में ले लेवें, जिससे मेरे सभी विषय विकार मिट जाएँ, पाप विनष्ट हो जाएँ मैं संतों की मैं सेवा करूँ और आपमें मेरी श्रद्धा और भक्ति निरंतर बदती रहे। ॐकारस्वरुप ऐसे समस्त जगत के स्वामी की जय हो, जय हो । 

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