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संकटनाशनं विष्णुस्तोत्रं Sankatnaashanam Vishnu stotram

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जीवन में आने वाले किसी भी प्रकार के संकट से सामना करने की शक्ति इस मंत्र से प्राप्त होती है | इस स्तोत्र का पाठ करने से मनुष्य के ह्रदय में किसी भी प्रकार की चिंता या भय का कोई स्थान नहीं रहता है | संकटनाशनं विष्णुस्तोत्रं श्री वेद व्यास उवाच: पुनर्दैत्यं समायान्तं दृष्ट्वा देवा सवासवाः| भय्प्रकम्पिता सर्वे विष्णु स्त्रोतुं प्रचक्रमु ||१ || देवा उचु: नमो मत्स्य-कुर्मादि नाना- स्वरुपै: | सदा- भक्त कार्योद्यातायार्तिहन्त्रे ||२ || विधात्रादि सर्गस्थिति -ध्वंसकर्त्रे | गदा-शंख -पद्मारिहस्ताय तेsस्तु ||३ || रमा-वल्लभायसुराणां निहन्त्रे | भुजंगारियानाय पीताम्बराय ||४ || मखादि क्रियापाककर्त्रे विकर्त्रे | शरण्याय तस्मै नतास्मोंनतास्म ||५|| नमो दैत्यसंतार्पितामर्त्यदुःख | चलदध्वन्स्दम्भोल्ये विष्णवे ते ||६|| भुजन्गेश- तल्पेश्यायार्क-चन्द्र | द्विनेत्राय तस्मै नता:स्मों नतास्मः ||७|| नारद उवाच: संकटनाशनं नाम स्तोत्रमेतत पठेन्नरः | स कदाचिन्न ...