संदेश

लक्ष्मी लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्री लक्ष्मीकवचम्

            श्री लक्ष्मीकवचम् शिरो मे रक्षताद् देवी , पद्मा पंकजधारिणी । भालं पातु जगन्माता , लक्ष्मीः पद्मालया च मे ।। मुखं पायान्महा-माया , दृषौ मे भृगुकन्यका । घ्राणं सिन्धु-सुता पायान् नेत्रे मे विष्णुवल्लभा ।। कण्ठं रक्षतु कौमारी , स्कन्धौ पातु हरिप्रिया । हृदयं मे सदा रक्षेत् सर्व-शक्तिविधायिनी ।। नाभिं सर्वेष्वरी पायात् सर्वभूतालया च मे । कटिं च कमला पातु , उरू ब्रह्मादिदेवता ।। जंघे जगन्मयी रक्षेत् , पादौ सर्वसुखावहा। श्री वीजवासनिरता , सर्वांगे जनकात्मजा ।। सर्वतोभद्र-रूपा मामव्याद् दिक्षु विदिक्षु च । विषमे संगटे दुर्गे , पातु मां व्योमवासिनी ।।

महालक्ष्म्यष्टकम् Mahalakshmyastakam

देवराज इंद्र ने देवी महालक्ष्मी की स्तुति की | वह स्तोत्र जन कल्याण के लिए विख्यात हुआ | महालक्ष्मी की दृष्टि मात्र पड़ जाने से व्यक्ति श्री युक्त हो जाता है | प्रत्येक को इस स्तोत्र का पाठ अवश्य करके प्रसन्नता प्राप्त करनी चाहिए | महालक्ष्म्यष्टकम् इन्द्र उवाचः नमस्तेsस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते शङ्ख-चक्र-गदाहस्ते महालक्ष्मी नमोsस्तुते| नमस्ते गरुढारूढे कोल्ह़ासुर भयङ्ग्करि सर्वपापहरे देवी महालक्ष्मी नमोsस्तुते | सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्ग्करि सर्वदु : खहरे देवी महालक्ष्मी नमोsस्तु ते| सिद्धि-बुद्धि-प्रदे देवी भुक्ति-मुक्ति- प्रदायिनि मन्त्रमूर्ते सदादेवी महालक्ष्मी नमोsस्तुते| आद्यन्तरहिते देवी आद्यशक्ति महेश्वरी ...